सफर और मेरा पहाड़
सफर और मेरा पहाड़ शहर से पहाड़ को निकलते हुए बस में बेतसाहा चिड़ चिड़ा हो गया था वही पुरानी बस कुछ सीटों पे टल्ले लगे हुए और कुछ टूटी हुई और उस में कुछ पहाड़ी भाई तो कुछ शहरों से घूम कर जाते हुए हमारे पहाड़ी भोली भाली आमा…
मेले:- हमारी कुमाऊंनी संस्कृति/ परम्परा/रीती रिवाज़ के अभिन्न अंग – श्री के.आर. मठपाल
हमारे कुमाऊँ अंचल में विभिन्न पर्वों के अवसर पर मेले आयोजित होते रहते हैं। यह कुछ मेले धार्मिक आस्था, सद्भावना, भाई चारा,मनोरंजन, मेल-मिलाप आदि को दर्शाते हैं I
मंथन की बेला – श्री दीपक सिंह परिहार
मेरे देवतुल्य बंधुओं ! जय बद्री विशाल , जय बाबा केदार जय गोल्ज्यू महाराज जय बागनाथ देवता जय श्री इष्ट देवता आज कुमाऊं समाज उस भाव ,चिंतन और स्थान पर खडा है जहां पर बुद्धि भावहीन व शून्य हो जाती है l
पलायन की समस्या रोकने का एक प्रयास – श्री मनमोहन सिंह बिष्ट
उत्तराखंड (पूर्व में उत्तरांचल), जो 2000 में उत्तर प्रदेश से अलग होकर बना, अब 24 वर्ष का हो चुका है। राज्य कई समस्याओं का सामना कर रहा है, लेकिन पलायन (migration) की समस्या कुमाऊँ क्षेत्र में बहुत ही गंभीर और तीव्र है।
1983 करवट 2024 – श्री कमल चंद्र कांडपाल
जय भारत ! जय उत्तराखंड ! जय कुमाऊं । सन् 1983 मैं जब चण्डीगढ़ आया था तो पता चला यहां पर कुमाऊँ सभा की रामलीला सैक्टर 23 में होती थी । शिव दत्त फुलारा जी रामलीला के डारेक्टर होते थे । उनके सरकारी मकान सैक्टर 20 चण्डीगढ़ में इसकी तैयारी…
नई वेबसाइट लांच करने पर कुमाऊँ सभा को बधाई – श्री आनंद सिंह नेगी
कुमाऊं चंडीगढ़ सभा के सानिध्य में आज कुमाऊं सभा ने वेबसाइट को स्थापित कर इतिहास के पन्नों पर नए अध्याय को अंकित कर समुचित कुमाऊं के लोगों को गौरवान्वित करने का अद्भुत कार्य किया है

